शिक्षा और अंधविश्वास
holi festival drawing hindus
Holi Holi होली का त्यौहार पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है, बड़ी उत्सव के साथ
होली के त्यौहार में अनेक प्रकार के रंगों से मनाई जाती हैं होली का त्योहार भारत वर्ष बड़े धूमधाम से मनाई जाती है यदि देखा जाए तो होली के त्योहार पर बहुत से हादसे भी होते हैं । कई लोग तो शराब के नशे में एक दूसरे से मारपीट भी करते हैं जो कि यह बहुत गलत बात है यदि इस त्योहार पर इस तरह का माहौल हो तो खुशी का त्यौहार नहीं कहां जा सकता है ,जहां खुशी के त्यौहार में पल में गम में बदल जाए वह खुशी का त्योहार नहीं कहा जा सकता है , यहां काल का लोग हैं । कोई भी इस धरती लोक पर कोई भी प्राणी सुखी नहीं है। खुशी का त्योहार नहीं मना सकता है, क्योंकि यहां कब किसी के साथ मैं बुरी बीत जाए , यदि हमें को होली खेलनी है तो असली राम नाम की पूर्ण गुरु बनाकर जो तत्वों से ज्ञान बताएगा इस वर्तमान समय में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अतिरिक्त कोई तत्वदर्शी संत नहीं है जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी वह तत्वदर्शी संत है जो पूर्ण परमात्मा की भक्ति बताबताएगा राम नाम की होली जब पूर्ण परमात्मा की भक्ति से राम राम की होली खेलनी चाहिए जहां राम नाम की होली खेलते हैं वहां कभी कोई गम नहीं होता है वहां हरदम राम नाम की होली खेलते हैं हमें वो खुशी पूर्ण परमात्मा के अतिरिक्त कोई नहीं दे सकता जिस पूर्ण परमात्मा में सृष्टि रचाई हैं वही हमें सर्व सुख प्राप्त करा सकते हैं हमारे चारों धर्मों के ग्रंथ बताते हैं , कि पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर हैं। परमात्मा ने छह दिन में सृष्टि रची सातवें दिन तखत पर जा बिराजा। कबीर परमेश्वर जी ने 600 साल पूर्व एक लहर तारा तालाब में शिशु का रूप बनाकर फूल पर विराजमान हुए थे और वह शिशु का रूप बनाकर एक नीरू नीमा नाम के दंपत्ति को मिली थे और उस परमेश्वर ने बड़े बड़े ऋषि यों को ज्ञान से पराजित कर दिया अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को क्लिक करें
https://youtu.be/eXBJuRQjTaUhttps://youtu.be/eXBJuRQjTaU
Holi Holi होली का त्यौहार पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है, बड़ी उत्सव के साथ
होली के त्यौहार में अनेक प्रकार के रंगों से मनाई जाती हैं होली का त्योहार भारत वर्ष बड़े धूमधाम से मनाई जाती है यदि देखा जाए तो होली के त्योहार पर बहुत से हादसे भी होते हैं । कई लोग तो शराब के नशे में एक दूसरे से मारपीट भी करते हैं जो कि यह बहुत गलत बात है यदि इस त्योहार पर इस तरह का माहौल हो तो खुशी का त्यौहार नहीं कहां जा सकता है ,जहां खुशी के त्यौहार में पल में गम में बदल जाए वह खुशी का त्योहार नहीं कहा जा सकता है , यहां काल का लोग हैं । कोई भी इस धरती लोक पर कोई भी प्राणी सुखी नहीं है। खुशी का त्योहार नहीं मना सकता है, क्योंकि यहां कब किसी के साथ मैं बुरी बीत जाए , यदि हमें को होली खेलनी है तो असली राम नाम की पूर्ण गुरु बनाकर जो तत्वों से ज्ञान बताएगा इस वर्तमान समय में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अतिरिक्त कोई तत्वदर्शी संत नहीं है जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी वह तत्वदर्शी संत है जो पूर्ण परमात्मा की भक्ति बताबताएगा राम नाम की होली जब पूर्ण परमात्मा की भक्ति से राम राम की होली खेलनी चाहिए जहां राम नाम की होली खेलते हैं वहां कभी कोई गम नहीं होता है वहां हरदम राम नाम की होली खेलते हैं हमें वो खुशी पूर्ण परमात्मा के अतिरिक्त कोई नहीं दे सकता जिस पूर्ण परमात्मा में सृष्टि रचाई हैं वही हमें सर्व सुख प्राप्त करा सकते हैं हमारे चारों धर्मों के ग्रंथ बताते हैं , कि पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर हैं। परमात्मा ने छह दिन में सृष्टि रची सातवें दिन तखत पर जा बिराजा। कबीर परमेश्वर जी ने 600 साल पूर्व एक लहर तारा तालाब में शिशु का रूप बनाकर फूल पर विराजमान हुए थे और वह शिशु का रूप बनाकर एक नीरू नीमा नाम के दंपत्ति को मिली थे और उस परमेश्वर ने बड़े बड़े ऋषि यों को ज्ञान से पराजित कर दिया अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को क्लिक करें
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